Saturday, December 15, 2018
INSPIRATIONALहिंदी कहानी

कुछ बड़ा करने की काबिलियत हमारे अन्दर भी है

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हमारी अपनी जिंदगी में कहानियों का बड़ा ही महत्व एवं योगदान रहा है , बहुत से ऐसे व्यक्ति होंगे जो किसी न किसी कहानी से inspire हुए होंगे , कंही न कंही कोई ऐसी कहानी होती है जो बदलाव का कारण बनती है . मैं दूसरों कि तो नहीं परन्तु अपने बांरे में ऐसा जरुर कह सकता हूँ कि मुझे कहानियों से काफी ज्यादा प्रेरणा मिलती है .

दोस्तों आज मैं आप लोग के समछ एक ऐसी ही कहानी लिखने जा रहा हूँ जिसे पढकर आपके अन्दर भी एक क्रांती जरुर पैदा होगी . यह सच है कि यह एक मन गढ़त कहानी है , अर्थात एक काल्पनिक कहानी है परन्तु इसका सारांश बहुत ही उम्दा है ,उम्मीद करता हूँ आप इसे पसंद करंगे और अपने दोस्तों में भी शेयर करेंगे .

किसी राज्य के  एक राजा को वंहा कि प्रजा ने उपहार में  बाज के दो बच्चे भेंट किये । बाज को पाकर राजा बहुत खुश हुआ क्यूंकि वे बाज  बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे ,और शायद राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे।

राजा उन बाजों को अपने राज महल में  लेकर आया और अपने एक मंत्री को आदेश दे दिया कि  उन बाजों के अच्छे से  देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त किया जाये .

राजा ने जैसा कहा था वैसा ही हुआ , उन बाजों के देखरेख के लिए राज्य के सबसे अनुभवी व्यक्ति को नियुक्त किया गया .

धीरे – धीरे एक लम्बा समय बीत गया . अचानक एक दिन जब कुछ महीने बीत गए तो राजा ने बाजों को देखने का मन बनाया ,और अपने उस मंत्री के साथ उस स्थान पर  पहुँच गए जहाँ उन्हें पाला पोषा जा रहा था।

राजा ने वंहा पहुचकर देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे और अब पहले से भी ज्यादा सुन्दर एवं शानदार लग रहे थे ।

राजा को इन बाजों कि उड़ान को देखने कि बड़ी उत्सुकता हुयी  इसलिए राजा ने  बाजों की देखभाल कर रहे उस आदमी से कहा, ” मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ , तुम इन्हे उड़ने का इशारा करो ।

जैसे ही राजा का हुक्म मिला, उस आदमी ने बाजों को उड़ने का इशारा किया और  इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे .

पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था , वहीँ दूसरा , कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ गया  जिस पेड़ कि डाली से वो उड़ा था।

यह  देख , राजा को कुछ अजीब सा लगा.

“क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा ?”, राजा ने सवाल किया।

” जी हुजूर , इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है , वो इस डाल को छोड़ता ही नहीं है ।”

राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे , और वो दूसरे बाज को भी उसी तरह उड़ना देखना चाहता था .

अगले दिन राजा ने पूरे राज्य में ऐलान करा दिया कि जो व्यक्ति इस बाज को ऊँचा उड़ाने में कामयाब होगा उसे ढेरों इनाम दिया जाएगा।

फिर क्या था , एक से एक विद्वान् आये और बाज को उड़ाने का प्रयास करने लगे , पर हफ़्तों बीत जाने के बाद भी बाज

का वही हाल था, वो थोडा सा उड़ता और वापस उसी डाल पर आकर बैठ जाता।

फिर एक दिन कुछ अनोखा हुआ , राजा ने देखा कि उसके दोनों बाज आसमान में उड़ रहे हैं।

उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ और उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति का पता लगाने को कहा जिसने ये कारनामा कर के

दिखाया था। खोज करने पर पता चला कि वह व्यक्ति एक किसान था। अगले दिन वह दरबार में हाजिर हुआ।

राजा ने अपने कहे अनुसार उसे इनाम में स्वर्ण मुद्राएं भेंट किया .

,राजा ने उस किसान से कहा कि –

” मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ , बस तुम इतना बताओ कि जो काम बड़े-बड़े विद्वान् नहीं कर पाये वो तुमने कैसे कर दिखाया।“

“मालिक ! मैं तो एक साधारण सा किसान हूँ , मैं ज्ञान की ज्यादा बातें नहीं जानता , मैंने तो बस उस  डाल को ही काट दिया जिसपर बैठने का बाज आदि हो चुका था, और जब वो डाल ही नहीं रही तो वो भी अपने साथी के साथ ऊपर उड़ने लगा”.

दोस्तों इस कहानी का शारांश यही है कि अगर हम भी किसी ऐसी आदत के आदि हो चुकें हैं, और यह आदत हमारी प्रगति में बाधक है , तो उस आदत को हमेशा कि लिए ख़त्म कर दें अर्थात उसे जड़ से हटा दें .

दोस्तों, हम सभी ऊँचा उड़ने के लिए ही बने हैं , हम अक्सर भूल जातें हैं कुछ बड़ा करने की काबिलियत हमारे अन्दर भी है बस हमें उसके अनुरूप सही कदम एवं कार्य करने हैं .

यदि आप भी सालों से किसी ऐसे ही काम में लगे हैं जो आपके सही potential के मुताबिक नहीं है तो एक बार ज़रूर सोचिये कि कहीं आपको भी उस डाल को काटने की ज़रुरत तो नहीं जिसपर आप बैठे हैं.

 

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