संघर्ष से घबराये नहीं,  और मेहनत करते रहें

`सफलता को अति शीध्र पाने कि  लालशा हर व्यक्ति में होती है, लेकिन इस सफलता के पीछे जो संघर्ष की जरुरत होती है, वह हर कोई कर नहीं पाता है, और यही कारण बनता है कि असफल व्यक्ति कि संख्या ज्यादा और सफल व्यक्ति कि संख्या कम होती है। सफलता कोई एक दो दिन के मेहनत का फल नहीं है , जो इतनी आशानी से हासिल हो जाए , और मुझे नहीं लगता ऐसी सफलता का कोई ज्यादा महत्त्व होता होगा जो आशानी से मिल जाए । महत्व उसी सफलता को मिलती है जिसके पीछे संघर्ष कि कहानी होती है , जिसे पाने के लिए रात और दिन एक कर देने होते हैं  ।

दोस्तों आज मैं आप लोगों से एक ऐसी ही कहानी शेयर करने जा रहा हूँ जिसे पढकर आप लोग अपने आत्मविश्वास को गिरने नहीं देंगे एवं और भी ज्यादा संघर्ष करते हुए अपने – अपने लक्ष्य कि तरफ बढ़ते रहने कि कोशिश करेंगे ।

इस कहानी कि शुरुवात कुछ इस तरह से है –

एक नौजवान युवक अपने लक्ष्य अर्थात सफलता कि प्राप्ति हेतु बड़े समय से संघर्ष कर रहा था । परन्तु कई वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई खाश सफलता हाशिल नहीं हुयी । वह व्यक्ति काफी निराश हो चूका था  और अपने आत्मविश्वाश को ख़त्म कर अपने अन्दर नकारात्मक विचारो को पैदा कर लिया था । उसने इस कदर उम्मीद खो दी कि उसने आत्महत्या करने का मन बना लिया।

वह आत्महत्या करने कि मंशा बना लिया और ऐसा करने के लिए  वह नदी के पास गया और वह आत्महत्या करने ही जा रहा था कि अचानक एक सन्त ने उसे देख लिया। संत ने उसे देखते ही  आत्महत्या करने से रोका और सन्त ने उससे कहा – बच्चे क्या बात है , तुम ऐसा क्यूँ  कर रहे हो ?

उस युवक ने जवाब दिया – मैं जीवन में संघर्ष करते -करते थक गया हूँ और कुछ हाशिल नहीं कर पाया इसलिए मैं आत्महत्या करके अपने इस बेकार जीवन को नष्ट करना चाहता हूँ।

सन्त ने पूछा तुम अपना यह संघर्ष कितने दिनों से कर रहे हों ?  युवक ने जवाब दिया कि  मुझे दो वर्ष के लगभग हो गए,  मुझे ना तो कहीं नौकरी मिली है, और ना ही किसी परीक्षा में सफल हो सकां हूँ।

सन्त ने कहा , बच्चा तुम्हे वह हर सफलता मिलेगी जिसके तुम सही में हकदार हो , तुम्हे नौकरी भी मिल जाएगी और तुम सफल भी हो जायोगे। निराश न हो , और इसे प्राप्त करने के लिए कुछ दिन और प्रयास करो।

युवक ने कहा– मैं किसी भी काम के योग्य नहीं रहा हूँ, अब मुझसे ज्यादा संघर्ष नहीं  हो पायेगा ।

जब सन्त ने देखा कि युवक बिलकुल हिम्मत हार चुका है तो उन्होंने उसे एक कहानी सुनाई।

“एक बार एक व्यक्ति ने दो वृछ लगाये , एक बांस का, और एक फूल का।

फूल  वाले पौधे में तो कुछ ही दिनों में पत्तियाँ निकल आई और वह पौधा एक साल में काफी बढ़ भी गया पर बाँस के पौधे में साल भर में कुछ नहीं हुआ।

लेकिन वह व्यक्ति निराश नहीं हुआ। लगातार खाद पानी देता रहा  , परन्तु दूसरे वर्ष में भी बाँस के पौधे में कुछ नहीं हुआ। और वन्ही फुल का  पौधा और बढ़ गया।

व्यक्ति ने फिर भी निराशा नहीं दिखाई और व्यक्ति लगातार खाद पानी देता रहा । तीसरे वर्ष और चौथे वर्ष भी बाँस का पौधा वैसा ही रहा, लेकिन फूल  का पौधा और बड़ा हो गया।

फिर कुछ दिनों बाद बाँस के पौधे में अंकुर फूटे और देखते – देखते कुछ ही दिनों में बाँस का पेड़ काफी ऊँचा हो गया।

बाँस के पेड़ को अपनी जड़ों को मजबूत करने में चार पाँच साल लग गए। और जब तक जड़ मजबूत नहीं हुयी थी तब तक बांस के पौधे में से अंकुर नहीं फूटे थे ।

सन्त ने युवक को यही समझाया  – कि यह आपका यह संघर्ष का समय जो बीत रहा है वह जड़ें मजबूत करने में बीत रहा है , अभी यह समय जड़ों को मजबूत करने का समय है।

आप इस समय को व्यर्थ नहीं समझे एवं निराश न हो। जैसे ही आपकी जड़ें मजबूत एवं  परिपक्व हो जाएँगी, आपकी सारी समस्याओं का निदान हो जायेगा।

आप खूब फलेंगे, फूलेंगे, सफल होंगें और आकाश की ऊँचाइयों को छूएंगें।  आप स्वंय की तुलना अन्य लोगों से न करें। आत्मविश्वास नहीं खोएं। समय आने पर आप बाँस के पेड़ की तरह बहुत ऊँचे हो जाओगे। सफलता की बुलंदियों पर पहुंचोगे। फूल के पौधे की जड़ें बहुत कमज़ोर होती हैं जो जरा सी तेज़ हवा से ही जड़ से उखड जाता है और बाँस के पेड़ की जड़ें इतनी मजबूत होती हैं कि बड़ा सा बड़ा तूफ़ान भी उसे नहीं हिला सकता। आपको भी अपनी जड़ें बांश के पेड़ कि तरह ही मजबूत करना है

 

बात युवक के समझ में आ गई और वह पुनः  संघर्ष के पथ पर चल दिया। दोस्तों संघर्ष से घबराये नहीं। मेहनत करते रहें और अपनी जड़ों को इतनी मजबूत बना लें कि बड़े से बड़ी मुसीबत, मुश्किल से मुश्किल हालात आपके इरादो को कमजोर ना कर सके और आपको आगे बढ़ने से रोक ना सके। किसी से भी अपनी तुलना ना करे , सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की और बढ़ते रहे। आप जरूर सफल होंगे और आसमान की बुलंदियों को छुयेंगे।

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